गर्भावस्था
के पहले सप्ताह
के दौरान महिला
को अपनी गर्भावस्था
का पता भी
नही चल पाता
है। प्रेगनेंसी के
पहले सप्ताह में
भ्रूण बनने की
शुरुआत होती है,
भ्रूण का विकास
होना शुरू नहीं
होता है। हालाँकि
गर्भावस्था के पहले
सप्ताह के दौरान
महिला गर्भवस्त नहीं
होती हैं, लेकिन
गर्भावस्था के 40 सप्ताह में
इस सप्ताह को भी गिना
जाता है। प्रेगनेंसी
के बाद स्त्री
प्रेगनेंसी के विभिन्न
चरणों से गुजरती
है। गर्भावस्था के
प्रारम्भिक चरणों में महिला
को गर्भावस्था की स्थिति
का पता भी
नहीं चल पाता, लेकिन
प्रेगनेंसी की संभावना
होने पर बीच-बीच में
चिकित्सक से जांच कराने पर इस स्थिति
और प्रेगनेंसी के
शुरूआती लक्षणों को पहचाना
जा सकता है।
जानिए इस लेख
के जरिए प्रेगनेंसी
के विभिन्न लक्षणों और
प्रेगनेंसी के पहले
सप्ताह के
बारे में।
पहले सप्ताह के लक्षण-
·
गर्भधारण
की अवस्था में
अक्सर महिला
को थकान रहने
की शिकायत होने
लगती है। गर्भावस्था
के शुरूआती दिनों में पैरों
पर सूजन दिखाई
देने लगती है और सर-दर्द
होने लगता है। प्रेगनेंसी
का पहला
दौर एक माहवारी के पूरा
होने से दूसरी
महावारी के शुरू
होने के बीच
का होता है।
यानी पहली महावारी
के अंतिम दिन
से दूसरी महावारी
तक गर्भधारण हुए
28 दिन मान लिए
जाते हैं। हालांकि
यह निश्चित नहीं
है, लेकिन आमतौर
पर प्रेगनेंसी की
स्थिति में यही फॉर्मूला
अपनाया जाता है।
·
प्रेगनेंसी
के फर्स्ट वीक
में स्त्री के
शरीर में अंदरूनी
तौर पर बहुत
से बदलाव चल
रहें होंते हैं,
लेकिन इस समय
शरीर के बाहर
कोई बदलाव नहीं
दिखता। स्वस्थ स्त्री को
प्रतिमाह माहवारी निश्चित समय
या उसके आसपास
होती है, लेकिन
प्रेगनेंसी के पहले
लक्षण में माहवारी
आनी बंद हो
जाती है। गर्भधारण
के प्रारम्भिक क्षणों
में बार-बार
पेशाब का आना, जी
मिचलाना, उल्टी होना, आदि
शामिल है।
·
माहवारी
के 14 दिनों के बाद
ओवुलेशन का समय
शुरू हो जाता है।
यह समय प्रेगनेंसी
के लिए बेहतर
होता है। प्रेगनेंसी
के बाद हार्मोंन
परिवर्तन होने लगते
हैं, जिससे गर्भवती
स्त्री के व्यवहार
में बदलाव आना
शुरू हो जाता
है। गर्भावस्था में
स्त्री के शरीर
में हार्मोन के
बढ़ने से उनके
व्यवहार और दिनचर्या
में काफी उतार-चढ़ाव आते
है। महिला को
कभी अच्छा लगता
है और कभी
बहुत बुरा लगता
है। प्रेगनेंसी के
फर्स्ट वीक में उल्टियां आना
एक विशेष लक्षण
है। बार-बार
उल्टियां आने पर
एंटीबायोटिक लेने से
अच्छा है
कि एक अच्छे
चिकित्सक की सलाह
लें।
·
प्रेगनेंसी
के पहले सप्ताह में गर्भवती
स्त्री के मुँह
का स्वाद
बहुत कड़वा और
कसैला हो जाता
है। गर्भवती स्त्री
को किसी भी
प्रकार का भोजन
स्वाद नहीं लगता,
सिर्फ गर्भवती स्त्री
को खट्टी चीजों का स्वाद ही
समझ में आता
है।
गर्भधारण के बाद आहार-
·
गर्भवती
महिला को अपनी खाने-पीने की
आदतों का ध्यान
रखना चाहिए। और
गर्भवती महिला को एक
अच्छे चिकित्सक की
सलाह लेनी चाहिए।
गर्भवती महिला को अपने
भोजन में प्रोटीन,
विटामिन और कैलोरी
की मात्रा बढ़ा
देनी चाहिए। लेकिन
ध्यान रहे गर्भवती
महिला को विटामिन-E और C की
मात्रा कितनी लेनी चाहिए इस
बारे में गर्भवती
महिला को चिकित्सक से
परामर्श जरूर लेना
चाहिए।
·
गर्भवती महिला को ज्यादा
दिनों से फ्रिज
में रखे भोज्य
पदार्थो का सेवन
नहीं करना चाहिए।
इसके अतिरिक्त गर्भवती
महिला को बासी
या गर्म चीजों
का सीधा सेवन
नहीं करना चाहिए।
गर्भवती
महिला को ताज़ा फलों
के जूस का
अधिक सेवन करना
चाहिए और ताज़ा सब्जियों
की अधिक मात्रा
अपने भोजन में
शामिल करनी चाहिए।
प्रेगनेंसी के बाद
गर्भवती महिला को अपने खान-पान में
तुरंत बदलाव कर
देना चाहिए। क्योकि
प्रेगनेंसी में महिला
को अपना ही
नहीं बल्कि अपने
गर्भ में पल
रहे भ्रूण का
भी ध्यान रखना
है।
·
प्रेगनेंसी में यानी
प्रारंभिक चरण से
ही महिला को मदिरापान,
नशीले पदार्थों का
सेवन आदि बंद
कर देना चाहिए।
प्रेगनेंसी में विटामिन-B यानी
फोलिक एसिड का
अधिक सेवन करना
चाहिए। इस विटामिन
का सेवन करने से होने वाले
बच्चे का दिमाग
और उसकी रीढ़
की मज़बूत होती
है। हालांकि गर्भवती महिला को चिकित्सक
से भी सलाह
लेनी चाहिए कि
क्या वह उचित
मात्रा में इस
विटामिन का उपयोग
कर रही या
नहीं।
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